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Saturday, 25 August 2012

रूह और तलाश...



























नदी पे 
तैरते अंगारे
उन अंगारों से निकलती
धुंए की स्याह लकीर
उन लकीरों में
दफन होते मेरे ख्वाब
उन दफन क्वाबो में 
भटकती मेरी रूह...

तुम्ही को तलाश करती है
पर तुम खोये कहाँ थे...
तुम तो छोड़ गए थे मुझे
एक बेगाना समझ कर
किसी अपने के लिए...

कौन ढूंढेगा हल इस सवाल का...
क्यों एक गैर को
मेरी रूह तलाश करती है
सदी दर सदी...





कविता संग्रह 'हो न हो' से...
सुधीर मौर्य 'सुधीर'   

Friday, 24 August 2012

हाँ तू मिल जाती जो तकदीर सवंर जाती मेरी...















फांका से दम न रहा कुछ यूँ कमज़ोर भी हैं
इक मुहब्बत के सिवा जहाँ में गम और भी हैं

मैंने सोचा था तेरे वस्ल से हसीं क्या होगा
तेरी जुदाई सा दर्द जहाँ में कहीं क्या होगा

साडी दुनिया है सनम गम की सताई हुई
अपना कुछ दर्द नहीं जो यूँ जुदाई हुई

हाँ तू मिल जाती जो तकदीर सवंर जाती मेरी
तेरे वस्ल से ज़ीस्त निखर जाती मेरी

कभी तो देख सनम ठण्ड से ठिठुरते बदन 
भरी जवानी में कमर से झुकते बदन

बेमौत मरते लोग पीप से भरे ज़ख्म
चलने को ताब नहीं हाय वो अम्राज़े-आलम

मुझको रहत की सनम अब कोई दरकार नहीं
हाँ तू अब ही है हसीं मुझको इनकार नहीं

ये भी हो सकता है तुझे गम से सरोकार नहीं
दिने गुजिश्ता की तरह मुझसे हो प्यार नहीं

युझ्को तो सनम वस्ल की राहत चाहिए
हमसफर महबूब की चाहत चाहिए

सिवाय उल्फ्ते गम के दुनिया में शोर भी है
इक मुहब्बत के सिवा जहाँ में गम और भी हैं....


कविता संग्रह 'हो न हो' से...
सुधीर मौर्य 'सुधीर;
  

Tuesday, 14 August 2012

न प्रताप में वो तड़प रही...



भ्रष्टाचारी कब तक लगायंगे दाग हिंद के भाल में,
कब तक समायंगे बेगुनाह असमय काल के गाल में.

एक तरफ तो चीन हे एक तरफ नापकियाँ हें,
फंस रहा हे देश फिर से दुश्मनों के जाल में.

कौन करेगा मुकाबला अब देश के आतंकियों  से,
न प्रताप में वो तड़प रही न ख़म शिवा की चाल में.

गाय चराना बंसी बजाने का अब कुछ है काम नहीं,
हाथो में अब चक्र उठाओ यदुनन्दन इस साल में.   

Sudheer Maurya
09699787634